प्रौढ़ बचपन

कर्मवीर रास्ते पर मैंने देखा नन्हा सा एक प्रौढ़ बचपन नहीं था उसके जीवन में माता - पिता का प्यार - दुलार उठा रखा था उसने हाथों में अपने ही जैसा इक बचपन साल चार के इस जीवन में सिखा दिया था जीना उसको जूझ रहा था पर हिम्मत से लिए जिम्मेदारियों का बोझ स्वयं नहीं थ... [पूरी पोस्ट]
writer अर्चना तिवारी
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[18 Jul 2009 12:18 PM]

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