वक़्त नहीं
हर खुशी है लोगों के दामन में, पर एक हँसी के लिये वक़्त नहीं, दिन रात दौड़ती दुनिया में, जिन्दगी के लिये ही वक़्त नहीं, माँ की लोरी का एहसास तो है, पर माँ को माँ कहने का वक़्त नहीं, सारे रिश्तों को तो हम मार चुके, अब उन्हें दफ़नाने का भी वक़्त नहीं, सारे ना...
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Anurag Srivastava
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[18 Jul 2009 10:23 AM]



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