गीत
दिन बहुत बीते, नहीं अब याद मुझ को गीत पहला // रागिनी सी उम्र थी और प्यार था संतूर सा , अश्रु कण भी नहीं थे और दर्द भी था दूर सा,जी रहा था पुष्प सा , मधुगंध सी थीं तुम प्रिये ,रूप की इस धूप में हर हर शक्श था मजबूर सा ,आज भी है याद मुझको बात पहली ,प्या...
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डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह
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[17 Jul 2009 22:39 PM]



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