फरीद के श्लोक - ३९
हौ ढूढेदी सजणा,सजणु मैडे नालि॥नानक अलखु न लखीऐ,गुरमुखि देऐ दिखालि॥१२१॥हंसा देखि तरंदिआ, बगा आइआ चाउ॥ढुबि मुऐ बग बपुड़े, सिरु तलि उपरि पाउ॥१२२॥मै जाणिआ वड हंसु है,तां मै कीता संगु॥जे जाणा बगु बपुड़ा,जनमि न भेड़ी अंगु॥१२३॥यह श्लोक गुरू रामदास जी के उच्चार...
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परमजीत बाली
परमजीत बाली
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[17 Jul 2009 15:22 PM]



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