बरसाती ख़याल कुछ यू भी

mehek मेघा आज फिर टुटके बरसे तुम मीत से माटी से ‘महक’ ऊठी , इश्क में सराबोर निकली | ================================ ये क्या हुआ ‘महक’, दीवानगी की सारी हदे पार कर ली सावन में बरसी हर बूँद तुने,अपने अंजुरी में भर ली | =================... [पूरी पोस्ट]
writer mehhekk

ishqmeetmehekshayariindradhanubaarish

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[17 Jul 2009 13:53 PM]

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