दीनानाथ
उम्र के आखिरी पड़ाव की ओर बढती हुई एक काया, जिसके बाल, शरीर और चहरे की झुरियां नून- रोटी की रोज- रोंज की जदोजहद की कहानी अपने आप बयाँ करते हैं। उसके चहरे पर के झूठी खुशामद करती हुई मुस्कान हमेशा कुछ यूँ चस्पा रहती कि उसकी आँखों की ज़ुबानी अपने फरेबीपन...
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Sudhir (सुधीर)
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[17 Jul 2009 13:05 PM]



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