शब्दों की तलाश में

कवितायन मैं, नही चाहता कि तुम किसी दिन भूल जाओ अपना नाम भी और गुमसुम बैठी रहो ताकते शून्य में और चेहरे पर उभर आयें आंसुओं की लकीरें किसी, प्रश्‍न के जवाब में तुम्हें तलाशने हो शब्द फिर थक-हार चुप बैठ जाना हो या बड़ी देर बाद कुछ कहो और, किसी प्रतिप्रश्‍न के जव... [पूरी पोस्ट]
writer मुकेश कुमार तिवारी
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[17 Jul 2009 09:04 AM]

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