पीठ के जो जख्म थे सब राजदारों ने दिए

प्रकाश पाखी यह गजल नहीं है बस एक कविता है.मैने पूरी कोशिश की थी कि रदीफ़ और काफिये का ख्याल रखूँ पर कहन इतना बुरी तरह से टूट रहा था कि मुझे लगा इसे एक कविता ही रहने दिया जाए.सो जैसी भी है आप के सामने पेश है... ये पता है तू लगा ले लाख बाजी जान की मतलबी दुनिया बड़... [पूरी पोस्ट]
writer abhivyakti
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[17 Jul 2009 07:08 AM]

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