कन्वेयर बेल्ट पर उगता अपनी माटी का सोना...

काहे को ब्याहे बिदेस.... फ्लाईट आये घंटे से ऊपर हो चला था पर उन दोनों का कहीं अता-पता न था... उनके आने की ख़ुशी में उसे ढाई सो मील के सफ़र का पता न चला, पर अब मंजिल पर पहुँच कर एक- एक मिनट घंटो से कम नहीं... वो उसके घर पहली बार आ रहे थे... पिता को तो एतराज़ ना था किन्तु उनकी... [पूरी पोस्ट]
writer neera
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[17 Jul 2009 06:13 AM]

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