समीक्षक बोले तो, मिठाई की दुकान चलाने वाला हलवाई
आप मानें या न मानें लेकिन हिंदी साहित्य में जो लोग अच्छे लेखक या साहित्यकार न बन सके, वे अंततः समीक्षक बन गए। हिंदी साहित्य में समीक्षक की स्थिति ‘मिठाई की दुकान चलाने वाले हलवाई’ के समान होती है। जिस प्रकार हलवाई अपनी दुकान में, ग्राहकों के लिए, तरह...
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अंशुमाली रस्तोगी
प्रसंगवश
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[17 Jul 2009 04:18 AM]



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