पुनर्वालोकन
पुल" मेरे तुम्हारे बीच भावनाओं का पुल कच्ची रेत सा ढह गया ! बस, सागर सी उमड़ती-घुमड़ती लहरों का तूफान रह गया !! न वो सेतु ही रहा न वो भावना ही स्वार्थ की रेल-पेल में सारा जीवन बह गया ! - डा0अनिल चडडा...
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©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
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[17 Jul 2009 02:40 AM]



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