एक नज़्म
मेरा प्यार तुम, मेरी जान तुम, तुम ही तो हो मेरी जिन्दगी। मेरे हमनफस तेरे साए में, पलती है मेरी हर खुशी। शब-ए-गम लिए था मैँ चल रहा सूने सफर में अब तलक, तुम आ मिली सरे राह जो, छायी फिजाँ में रोशनी। तेरे इश्क की परछाइयाँ, मेरे ज़ख्म-ए -दिल को सूकून दें,...
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प्रताप नारायण सिंह
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[17 Jul 2009 02:13 AM]



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