हम झूठे ही भले
वात्सल्य राय सच... बहुत मुश्किल है... सुनना भी और बोलना भी... सच। यूं तो हम सब सच्चे हैं। दिल से... जज्बात से... जुबान से और इरादों से भी। सच्चे हिंदुस्तानी। सच्चाई हमारी रगों में खून की तरह दौड़ती है। फिर भी सत्यवादियों की गिनती उंगलियों पर ही हो जा...
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Satyendra Prasad Srivastava
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[16 Jul 2009 18:47 PM]



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