कद्रू-विनता

kavyakala रामचरितमानस में एक चौपाई आती है: कद्रू विनतहिं दीन दुख, तुमहिं कौशिला देब। भरत बन्दिग्रह सेइहैं, लखन राम के नेब।। मन्थरा कैकेई से कहती है: (यदि राम राजा बने तो) तुम्हें कौशल्या वैसे ही दु:ख देगी जैसे कद्रू ने विनता को दिया था। भरत वन्दीगृह का सेवन कर... [पूरी पोस्ट]
writer Laxmi N. Gupta
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[16 Jul 2009 10:21 AM]

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