‘बित्ति बांधै डोरडी ठम्मा ठम, ठम्मा ठम‘
एक दौर हुआ करता था कि मां अपने बच्चों को घर में ठूंठती रह जाती थी, पर बच्चे चिलचिलाती धूप या कड़ाके की ठंड की परवाह किए बगैर यहां से वहां मारे मारे फिरते थे. वजह थी खेल. बच्चे खेल खेल में एक गांव से दूसरे गांव तक पहुंच जाते या फिर सुबह से शाम होने तक...
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aneeta
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[16 Jul 2009 08:10 AM]



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