बनावटी हक़
क्यों फिक्र हो हमे उन लोगों की, जो पल में रुप बदल जाते हैं, हँसते हैं किसी की हँसी मे शामिल होने के लिए, और रोता हुआ देख कर उनसे मुँह फेर जाते हैं, किसी की ज़िन्दगी का हिस्सा बनने के लिए, अपने अकेलेपन और दुखों को उनके जैसा बताते हैं, कहते हैं बिना कहे...
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Gurnam Singh Sodhi
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[16 Jul 2009 04:48 AM]



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