विदुर नीति-धनी बंधू के पास जाकर कष्ट न पाना

शब्दलेख सारथी ज्ञातयस्यतारयन्तीह ज्ञातयो मज्जयन्ति च। सुवृत्तास्तारयन्तीह दुर्वंतत्ता मज्ज्यन्ति च।। हिंदी में भावार्थ- इस संसार में अपने ही जाति बंधु जीवन की नैया पार भी लगाते हैं तो डुबोते भी है। जो सदाचारी है वह तो तारने के लिये तत्पर रहते हैं और जो दुराचारी है... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

dharmआत्म-विकास

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[16 Jul 2009 00:36 AM]

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