बरसात में
बूंदों की पायल लेकर, मग्न हो उनकी झंकार में, बादल की डफली लेकर, बना नया फनकार मैं, विदा हो रही गर्मी के संग, सावन की बारात में, गाँव मैं बरसों बाद गया था, भींग गया बरसात में । बूंदों की ऐसी धूम मची, हर शख्श वहां दीवाना हुआ, मेघों की छतरी लेकर, मौसम भ...
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Navnit Nirav
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[15 Jul 2009 15:45 PM]



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