ढोते ढोते उजले चेहरे .....( ग़ज़ल )

अनुरक्ति ग़ज़ल ..........( भूली बिसरी .....) ढोते ढोते उजले चेहरे , हमने काटी बहुत उमर ! अब तो एक गुनाह करेंगे , पछता लेंगे जीवन भर !! वो रेशम से पश्मों वाला , था तो सचमुच जादूगर ! मोर पंख से काट ले गया , वो मेरे लोहे के पर !! उसको अगर देखना हो तो , आंखों से... [पूरी पोस्ट]
writer ललितमोहन त्रिवेदी
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[15 Jul 2009 15:06 PM]

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