अनहद नाद
आलोक श्रीवास्तव की कविता-1 मूल्यांकन कविगण अमर होना चाहते हैं
समकालीन यथार्थ से टकराते-टूटते कविगण
कर रहे हैं समय का अनुवाद
लुटा-पिटा भारत उनकी भाषा में है
कस्बे के दुख हैं
महानगर की पीड़ाएं
उनके परिजन हैं
उनका प्यार है कविगण दुखी नहीं हैं कि लोग क्यो...
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PRIYANKAR
कविताएं/Poems
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[15 Jul 2009 14:10 PM]



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