अब आँखों में नही सैलाब कोई
अब आँखों में नही सैलाब कोई मुझे लौटा दे मेरे ख्वाब कोई अजब मजबूरिया थी चुप रही मै मुझे करता रहा आदाब कोई मै तूफानों से बचना चाहती थी मगर दरिया न था पायाब कोई नसीम निकहत...
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Rahul kundra
नसीम निकहत
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[15 Jul 2009 06:00 AM]



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