जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी !!

अभिव्यक्ति कब यहाँ से वहाँ ..... कब कहाँ से कहाँ , कितनी आवारा है ये मेरी जिंदगी !! कभी बनती सबा कभी बन जाती हवा , कितने रंगों भरी है मेरी ये जिंदगी !! जिंदगी - जिंदगी - जिंदगी - जिंदगी !! नाचती कूदती - चिडियों सी फूदती , चहचहाती - खिलखिलाती मेरी जिंदगी !! जिंद... [पूरी पोस्ट]
writer gargi gupta
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[15 Jul 2009 00:49 AM]

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