गांवों की शोभा बढ़ाता है सारस

कुदरतनामा सूरज डूबने लगा है, परछाइयां लंबा रही हैं। हवा के मंद-मंद बहाव के साथ-साथ रात और खामोशी धीरे-धीरे उतर रही हैं। इसी वक्त सारस का एक जोड़ा अपनी बिगुल जैसी आवाज में पुकार उठता है। कितनी रोमांचक लगती है उसकी यह पुकार। धीमे-धीमे पंख चलाते हुए, जमीन से मानो... [पूरी पोस्ट]
writer बालसुब्रमण्यम
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[14 Jul 2009 21:46 PM]

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