कभी यूं करना !
एक' झूठी चादर से ढककर क्यों ? पाप छिपाते हो क्यों ? सच को अंदर कर झूठ दिखाते हो क्यों ? गम के चेहरे पर हंसी लगाई है क्यों ? हंसते हो दिल में तन्हाई है ।। 'दो' बदला, उन सभी से लूंगा एक दिन जिनके कारण मिली रात मिली तनहाई ।। उनको दूंगा प्यार और चमकीली स...
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जितेंद्र भट्ट
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[14 Jul 2009 10:45 AM]



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