खून के व्यापारी

पंजाबी लघुकथा अमरजीत अकोई “डाक्टर साब, यह लो पर्ची और दवाइयाँ दे दो।” फटेहाल रिक्शा-चालक ने कैमिस्ट की दुकान पर पर्ची पकड़ाते हुए कहा। “भई पैसे दो, अब ऐसे दवाई नहीं मिलती।” “तुम दवाई दो जल्दी से, मैं अभी आकर खून की बोतल दे देता हूँ।” “न भई न, खून का धंधा तो बंद कर... [पूरी पोस्ट]
writer दीपशिखा
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[14 Jul 2009 08:15 AM]

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