उठ जाग मुसाफिर

तलाश उठ जाग मुसाफिर उठ जाग मुसाफिर सुबह को ना जागा , अब तो जाग जीवन की दोपहर होने को आई है। सुन साथी दुनिया पहुँची मंगल पर फ़िर क्यूं तू ठहरा पेड़ की छाँव में देख , परख , चल उठ उठ जाग मुसाफिर सुबह को ना जागा , अब तो जाग जीवन की दोपहर होने को आई है। सुन साथ... [पूरी पोस्ट]
writer सुशील कुमार छौक्कर
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[14 Jul 2009 02:39 AM]

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