सवा लाख बनाम पनेसर

भूख वात्सल्य राय अचानक गुरू महाराज याद हो आए। ' सवा लाख से एक लड़ाऊं '। पापा भी साथ मैच देख रहे थे और कॉलिंगवुड के आउट होते ही, उन्होंने कंगारुओं की जीत तय मान ली थी। उनका कहना था, ' पनेसर के बस का कुछ नहीं है '। क्रिकेट को लेकर अगर बहस हो तो पापा के मुक... [पूरी पोस्ट]
writer Satyendra Prasad Srivastava
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[13 Jul 2009 21:38 PM]

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