एक ख्वाहिश.....
बड़ी मासूम सी ख्वाहिश हो.... ज़िंदगी को हर लम्हा..... पीने की इजाज़त हो..... तेरे आगोश में सिमटूं मैं...... ना फिर सांसों की गुज़ारिश हो.... यही ख्वाब हैं मेरे.... बस इन ख्वाबों की इबादत हो... वो पहलू हो.... वो लम्हें हो...... ना कोई और फिर ख्वाहिश ह...
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tanu sharma.joshi
तुम....
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[13 Jul 2009 14:49 PM]



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