...और कितना कुचलोगे !!

मन सड़क के एक किनारे से दो पहिए की छोटी गाड़ी पर घिसटती मानवता जा रही थी उस पार, चार पहिए की बड़ी गाड़ी पर सवार बाजारुपन से कुचल गई फिर भी घिसटती रही अब गाड़ी पर नहीं सड़क की सतह से एकाकार हो रही थी बार-बार कुचली जाकर ।... [पूरी पोस्ट]
writer मिथिलेश श्रीवास्तव
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[13 Jul 2009 14:48 PM]

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