फ़िर अजनबी फिजाओ से जोड़ा गया मुझे
फ़िर अजनबी फिजाओ से जोड़ा गया मुझे मै फूल थी जो शाख से तोडा गया मुझे मिटटी के बर्तनों की तरह साडी जिंदगी तोडा गया मुझे कभी जोड़ा गया मुझे हाथो में सौप कर मेरे कागज़ की एक नाव दरिया के तेज़ धार पर छोडा गया मुझे खुशबू की तरह जीना भी आसान तो नही फूलो से कत...
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Rahul kundra
नसीम निकहत
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[13 Jul 2009 07:54 AM]



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