आज महफ़िल में कोई
कभी कभी ये जो आप सबका प्रिय ‘ बवाल ’ है ना, इसे हमें ‘रय दुष्ट ’ कहने का मन किया करता है. पता है क्यों ? इसका मूडे-मंज़र अजीब ही होता है. ये शायर-वायर टाइप के लोग ऐसे ही होते हैं क्या ? अब देखिए ना. एक ज़माने में गुरूजी पंकज सुबीर साहब ने, इस साल होली...
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Udan Tashtari
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[12 Jul 2009 22:49 PM]



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