शोक के निजी पलों का क्रूर तमाशा
आजकल कीर्तियां भी इस आधार पर बनती हैं कि किसने किस पर प्राणघातक यानी छविभंजक हमला किया। कुछ आलोचक तो ऐसे मिल जाएंगे जिन्होंने सिवाय इसके कुछ और आलोचना में किया ही नहीं है। इसका भी महत्व कम होता जा रहा है कि आपकी दृष्टि क्या है। विचारधारा के समापन का...
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Uday Prakash
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[12 Jul 2009 14:39 PM]



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