एक जागरण कविता
जब तक गज़ल पूरी होती है आइये आपको शुद्ध हिंदी में एक कविता सुनाता हूं। छंद वही है जो जयशंकर प्रसाद के " हिमाद्रि तुंग शृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती" या रावणकृत "शिव-ताण्डव स्तोत्र " में है। तो लीजिए पेश है एक जागरण-कविता। डटी रहे बिना झुके, कहां गई जवा...
[पूरी पोस्ट]
रविकांत पाण्डेय
27
4
0
4
8
[12 Jul 2009 11:57 AM]



Shuffle








