रात में हारमोनियम
यहां वर्षों से हाशिए में डाल दिए गये अपने कविता संग्रह 'रात में हारमोनियम' के बिल्कुल अंतिम पन्ने पर छपी कविता प्रस्तुत कर रहा हूं। उम्मीद है आप पसंद करेंगे। ॥ ताना बाना ॥ हम हैं ताना, हम हैं बाना । हमीं चदरिया, हमीं जुलाहा, हमीं गजी, हम थाना ॥ नाद ह...
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Uday Prakash
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[12 Jul 2009 06:22 AM]



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