मेरा ज़िक्र ना करना

मेरे बोलों को तुम अपनी रवानी दे दो !!! किसी महफिल या वीरानों में मेरा ज़िक्र ना करना, किन्ही अपने बेगानों में मेरा ज़िक्र ना करना, हर कोई समझ ना सकेगा हमारी दोस्ती को, अपने दीवानों से मेरा ज़िक्र ना करना, अकेले बैठ कर सोचो जब मेरे बारे में, देखो कहीं लफ्ज़ों का सहारा ना लो तुम, कुछ सोच के चाह... [पूरी पोस्ट]
writer Anurag Srivastava
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[12 Jul 2009 02:55 AM]

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