तू वफ़ा कर ना कर
तू वफ़ा कर ना कर , मुझको तो वफ़ा की आदत है ये और बात है कि जफा , रास आती कब है कैसे चुन लूँ मैं काँटें, चमन की झोली से गुलाब रह-रह के जब लुभाते हैं घर से चलते हैं , साबुत आने की दुआ करते हैं कैसे न माँगें खैर उनकी , जो दुआओं से हमें मिलते हैं बिखरे -बि...
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शारदा अरोरा
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[12 Jul 2009 02:04 AM]



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