एक पत्र बुर्के के नाम

सुमित के तड़के (गद्य) प्यारे बुर्के मियाँ , सादर पर्दस्ते , और कैसे है ? आप भी सोच रहे होगे कि अमां सुमित मियाँ लगता है पगला गए हैं या भांग - वां ग खाने लगे हैं जो आदमियों को छोड़ अब चीजों से बतियाने लगे है । वैसे आपको यह जान कर बहुत खुशी होगी कि अपन लेखक और कवि हैं और आपन... [पूरी पोस्ट]
writer सुमित तोमर
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[11 Jul 2009 12:08 PM]

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