शिष्टाचार
यह घटना उस समय की है जब ईश्वरचन्द्र विद्यासागर संस्कृत कालेज के आचार्य थे । एक बार उन्हें किसी काम से प्रेसीडेंसी कालिज के अंग्रेज आचार्य कैर से मिलने जाना पड़ा । कैर उस समय जूते पहने मेज पर पांव फैलाए बैठे थे । खड़े होकर स्वागत करने की तो बात दूर रही,...
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दिनेश शर्मा
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[11 Jul 2009 10:24 AM]



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