‘कविता द्रव्य होती है, जो स्वतः बह निकलती है’

Srirajesh त्रिलोचन शास्त्री से पहली और आखिरी मुलाकात) श्रीराजेश आज सुबह बिजली फिर गुल हो गयी, रोजाना की तरह, और नींद जल्दी खुल गयी, काम कुछ था नहीं. होता भी कैसे ? दिल्ली या नोएडा आये अभी खींच-तान कर डेढ माह बीते हैं, सोचा कि बैग का सामान अव्यवस्थित हो गया है,... [पूरी पोस्ट]
writer Srirajesh
views
17
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
2
[11 Jul 2009 07:42 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix