'रात में हारमोनियम' से एक ज़रूरी और प्रासंगिक कविता
कई साल पहले 'रात में हारमोनियम' शीर्षक से मेरी कविताओं का संग्रह वाणी प्रकाशन से आया था। जैसा कि तय था- हिंदी कविता, विचारधाराओं और संस्थानों में सक्रिय प्रच्छन्न जातिवादी फ़ाशीवाद के चलते इसे भरसक हाशिए पर रखा गया। भाषा, संस्कृति और कलाओं के इलाके मे...
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Uday Prakash
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[11 Jul 2009 07:09 AM]



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