गीत - मौसम के मस्तक पर मैंने
मौसम के मस्तक पर मैंने नाम तुम्हारे लिख दी पाती और प्रतीक्षारत उत्तर में बादल का मन झांक रहा हूँ अक्सर मुझसे बतियाता है मस्त हवाओं का हरकारा आते- जाते बतला जाता क्या है प्रियतम हाल तुम्हारा झंझाओं को झेल रही है नित दीपक की जलती बाती कितना जीवन शेष अभ...
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kavideepakgupta
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[11 Jul 2009 05:11 AM]



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