मकां को कभी घर बनाया होता
यह मैं भली भांति जानता हुँ, कि मेरे शौक में अकविता-कविता लिखना रहा है। धीरे-धीरे अंतरजाल पर गज़अलों को पढते हुये और गुरूजी श्री पंकज सुबीर सा. की कक्षाओं से जो कुछ सीखा उसे आजमाने की कोशिश की है। आप सभी के विचार / सुझाव चाहूँगा। सादर, मुकेश कुमार तिव...
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मुकेश कुमार तिवारी
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[11 Jul 2009 04:32 AM]



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