कौटिल्य का अर्थशास्त्र-सिंह का वार कभी खाली नहीं जाता (shatru par singh ki tarah var karen-kautilya ka arthshastra)
मतप्रमतवत् स्थित्वा ग्रसदुत्पलुत्य पण्डितः। अपरिभश्यमानं हि क्रमप्राप्ते मृगेन्द्रवत्।। हिंदी में भावार्थ- बुद्धिमान व्यक्ति को मत्त और प्रमत्त के समान दिखावे में स्थित होकर शत्रु पर ऐसे ही प्रहार करते हैं जैसे सिंह करता है। उसका वार कभी खाली नहीं जा...
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दीपक भारतदीप
dharm
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[11 Jul 2009 01:26 AM]



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