चाणक्य नीति-आलस्य मनुष्य का शत्रु (alasya manushya ka shatru-chankya niti)
आलस्योपहता विद्या परहस्तगताः धनम्। अल्पबीजं हतं क्षेत्रं हतं सैन्यमनायकम्।। हिंदी में भावार्थ- आलस्य विद्या का नष्ट करता है। दूसरे के अधिकार में गया धन वापस नहीं आता। कम बीज वाला खेत नष्ट हो जाता है। बिना नायक के सेना हार जाती है। अभ्यासाद्धार्यत विद...
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दीपक भारतदीप
dharmआत्म-विकास
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[11 Jul 2009 01:24 AM]



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