संत कबीर वाणी-मनुष्यों में बुद्धि का अंतर होता है (manushy aur buddhi-sant kabir vani)
फेर पड़ा नहिं अंग में, नहिं इन्द्रियन के मांहि। फेर पड़ा कछु बूझ में, सो निरुवरि नांहि।। संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि सभी मनुष्यों के अंग एक तरह के हैं और सभी की इंद्रियों का काम भी एक जैसा है बस समझ का फेर है। इसलिये अपनी बुद्धि को शुद्ध रखने का...
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दीपक भारतदीप
dharm
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[11 Jul 2009 00:47 AM]



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