बूँदो को कहीं देखा है !!

अरे बिरादर !! बेरंग पत्तों पर सरसराती बूँदों को देखे एक अरसा हुआ! मुरझाए चेहरों के पीछे मन तक है तरसा हुआ! अभी एक कार रूकी है रेड लाइट पर कि‍ यकायक चल पड़ा है वाइपर! भीखू की हथेली पर पड़ी है चार बूँदें मचलकर अपनी बहन को दि‍खा रहा है, जो अभी छल्ले का करतब दि‍खाके स... [पूरी पोस्ट]
writer जितेन्द़ भगत
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[10 Jul 2009 08:16 AM]

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