इलैक्शन जीते बिना सांसदी
वे बेचारी तो शुद्ध भारतीय परम्परा का निर्वाह कर रही थीं पर उसी में धरी गईं। अब कोई अपने शौहर का अनुगमन भी न करे तो क्या करे। आगे आगे शौहर गए, पीछे पीछे बेगम चली गईं और जाकर लोकसभा में उन कुर्सियों में से एक पर बिराज गईं जिन पर बैठकर माननीय सद...
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डॉ. कमलकांत बुधकर
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[10 Jul 2009 04:16 AM]



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