यूं ख्वाब रोज सजाया करो...........
जो होंठो को मुस्कान दे, उन्हीं लम्हों को, आंखों में बसाया करो, सलवटें न पङ जाए, उनमें कभी, इन्हें रोज सुलझाया करो, ख्वाब ही तो हैं मासूम से, धुंधले न हो जाए कहीं, ये ख्वाब रोज, पलकों पे सजाया करो। .......... प्रीती बङथ्वाल "तारिका" (चित्र- साभार गूगल...
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PREETI BARTHWAL
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[10 Jul 2009 01:43 AM]



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