तश्वीर - क़िस्सा कुर्सी का....!

किस्सागोई यह तश्वीर ख़ास है। इलाहाबाद से लौट रहा था, गाड़ी आने में कुछ देर थी। स्टेशन के बाहर टहलते हुए, एकाएक मेरी नज़र पार्किंग में त्रिशंकु की तरह लटके हुए इस कुर्सी पर गई। ठहरा, सोचने लगा.....। मनीष के मोबाईल से तश्वीर उतारी। ऐसे भी यह कुर्सी कोई ऐसी वैसी... [पूरी पोस्ट]
writer Rajiv K Mishra : Roam-antic Realist
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[09 Jul 2009 18:11 PM]

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