बोलो न ? क्या है राज़?

मेरी रचनाएँ मैं जानना चाहता हूँ तुम्हारी हर मुस्कराहट का राज़........ कैसे तुम उड़ा देती हो? सिर्फ़ एक हँसी में मेरी ज़िन्दगी की परेशानियों को बेआवाज़ । मुझे तपती धूप में भी होता है ठंडक का एहसास तुम्हारे साथ। कैसे झाँक लेती हो? तुम मेरे अन्दर और देख लेती हो उन न... [पूरी पोस्ट]
writer महफूज़ अली
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[09 Jul 2009 12:18 PM]

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